भगवन राम के मंदिर बनाने की प्रतिबद्धता होने और चुनावी मुद्दे बनाने में बुनियादी अंतर है


Rakesh Sinha
भगवन राम के मंदिर बनाने की प्रतिबद्धता होने और चुनावी मुद्दे बनाने में बुनियादी अंतर है. जो बाबरी कमिटी वाले इसके न्यायिक समाधान की बात करते हैं उन्हें यद् होना चाहिए की उच्च न्यायलय के फैसले के बाद (फैसला मंदिर निर्माण के पक्ष में था) आर एस एस के सरसंघचालक मा श्री मोहन भगवत जी ने कहा था “न किसी की है न किसी की जीत है ने ही किसी की हार’. इस अवसर को secularist forces ने नकार दिया था . यह उनकी बेमन बौद्धिक चेहरे को उजागर करता है. बाबरी पर चिल्लाने वालो को एक सूचना: अभी उर्दू नई दुनिया (साप्ताहिक) ने कवर स्टोरी प्रकाशित किया है जिसमे कहा गया है कि मक्का -मदीना के विकास एवं सौन्द्रयिकरण के दौरान Prophet के कब्र एवं उनके द्वारा जिस मस्जिद में पहला ईद नमाज पढ़ा गया था उसे ध्वस्त कर पञ्च सितारा होटल बनेगा जहां आमिर हज यात्री आराम फरमा सकेङ्गे. बाबरी की ही नही है, भव्य राम मंदिर तो बनाना ही है,

http://www.ndtv.com/video/player/news/fromndtv/282323

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