संकट से मुक्ति का इकलौता रास्ता हंिदूुत्व


http://epaper.jagran.com/homepage.aspxMohanji Speech at Indor Sanghikजागरण ब्यूरो, पटना: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन मधुकर भागवत ने कहा है कि भारत को संकट से छुटकारा दिलाने का एकमात्र रास्ता हिंदुत्व है, जिसका मूल आधार ‘सबका सम्मान व सबका कल्याण’ है। अपने विविधतापूर्ण व विशाल देश का काम एक नायक से नहीं चलने वाला है। स्थानीय स्तर पर नायकत्व विकसित करना होगा। भागवत गुरु पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। 1परिवर्तन का आरंभ राजनीति से नहीं समाज से1भागवत ने कहा, देश में बहुत कुछ अच्छा हुआ है, लेकिन बीते दो-तीन वर्षो में स्थितियां निराशाजनक हुई हैं। जनमानस हताश है। देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी निभाने में जो असफल हैं, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। देश को समृद्ध बनाने के लिए समाज में गुणवत्ता व एकता जरूरी है। उन्होंने रवींद्र नाथ टैगोर के लेख ‘स्वदेशी समाज’ का जिक्र करते हुए कहा कि परिवर्तन का आरंभ राजनीति से नहीं समाज से होता है। मात्र सत्ता बदल जाने से कुछ नहीं होता। अपना देश इतना बड़ा और विविधता पूर्ण है कि यहां एक नायक से काम नहीं चलने वाला। स्थानीय स्तर पर नायकत्व विकसित होना चाहिए। संघ का एक मात्र काम विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी राह चलने वाले स्वयंसेवकों का निर्माण करना है।1देश की विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि बाहर से आने वालों को लगता है कि यहां कई देश एक साथ हैं। उनके मानस में हमारी संस्कृति की अवधारणा ही नहीं है, जबकि हमारी विविधता में ही एकता के सूत्र हैं। हमारी धरती हमारी आवश्यकता पूरी कर हमें अपने अपने तरीके से जीने का अवसर देती है। यही वजह है कि हम तमाम देवी देवताओं, विविध विश्वास और पूजा पद्धतियों के साथ सहिष्णुता से रह रहे हैं। यही भारत की मिट्टी की विशिष्टता है। हिन्दू संस्कृति भी यही है। 1संघ को समझने के लिए संघ में आएं1भागवत ने कहा कि विभिन्न देशों की भौगोलिक स्थितियां भिन्न भिन्न होती हैं। अरब देशों की धरती वहां कुछ नहीं देती। भारत की धरती यहां निवासियों को सबकुछ देती है। पारसी और हिब्रू को छोड़ कर भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही थे। यह बात विज्ञान से भी सिद्ध हो गई है। हमारी अपनी-अपनी पहचान एक बड़ी पहचान का हिस्सा बनाई जा सकती है। हमें हिंदुत्व के इसी आधार पर समाज को एक करना है। संघ के विषय में तमाम तरह की बातें लोगों के मन में है। संघ को समझने के लिए लोगों को चाहिए कि वे संघ में आएं। फिर अपने अनुभव के आधार पर कोई निर्णय लें। संघ को समझने के लिए संघ की प्रतिस्थापना को समझना जरूरी है।जागरण ब्यूरो, पटना: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन मधुकर भागवत ने कहा है कि भारत को संकट से छुटकारा दिलाने का एकमात्र रास्ता हिंदुत्व है, जिसका मूल आधार ‘सबका सम्मान व सबका कल्याण’ है। अपने विविधतापूर्ण व विशाल देश का काम एक नायक से नहीं चलने वाला है। स्थानीय स्तर पर नायकत्व विकसित करना होगा। भागवत गुरु पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। 1परिवर्तन का आरंभ राजनीति से नहीं समाज से1भागवत ने कहा, देश में बहुत कुछ अच्छा हुआ है, लेकिन बीते दो-तीन वर्षो में स्थितियां निराशाजनक हुई हैं। जनमानस हताश है। देश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी निभाने में जो असफल हैं, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। देश को समृद्ध बनाने के लिए समाज में गुणवत्ता व एकता जरूरी है। उन्होंने रवींद्र नाथ टैगोर के लेख ‘स्वदेशी समाज’ का जिक्र करते हुए कहा कि परिवर्तन का आरंभ राजनीति से नहीं समाज से होता है। मात्र सत्ता बदल जाने से कुछ नहीं होता। अपना देश इतना बड़ा और विविधता पूर्ण है कि यहां एक नायक से काम नहीं चलने वाला। स्थानीय स्तर पर नायकत्व विकसित होना चाहिए। संघ का एक मात्र काम विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छी राह चलने वाले स्वयंसेवकों का निर्माण करना है।1देश की विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि बाहर से आने वालों को लगता है कि यहां कई देश एक साथ हैं। उनके मानस में हमारी संस्कृति की अवधारणा ही नहीं है, जबकि हमारी विविधता में ही एकता के सूत्र हैं। हमारी धरती हमारी आवश्यकता पूरी कर हमें अपने अपने तरीके से जीने का अवसर देती है। यही वजह है कि हम तमाम देवी देवताओं, विविध विश्वास और पूजा पद्धतियों के साथ सहिष्णुता से रह रहे हैं। यही भारत की मिट्टी की विशिष्टता है। हिन्दू संस्कृति भी यही है। 1संघ को समझने के लिए संघ में आएं1भागवत ने कहा कि विभिन्न देशों की भौगोलिक स्थितियां भिन्न भिन्न होती हैं। अरब देशों की धरती वहां कुछ नहीं देती। भारत की धरती यहां निवासियों को सबकुछ देती है। पारसी और हिब्रू को छोड़ कर भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही थे। यह बात विज्ञान से भी सिद्ध हो गई है। हमारी अपनी-अपनी पहचान एक बड़ी पहचान का हिस्सा बनाई जा सकती है। हमें हिंदुत्व के इसी आधार पर समाज को एक करना है। संघ के विषय में तमाम तरह की बातें लोगों के मन में है। संघ को समझने के लिए लोगों को चाहिए कि वे संघ में आएं। फिर अपने अनुभव के आधार पर कोई निर्णय लें। संघ को समझने के लिए संघ की प्रतिस्थापना को समझना जरूरी है।पटना में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत। प्रेट्रअंग्रेजों ने सोचा था कि हिंदू-मुसलमान लड़ते-लड़ते खत्म हो जाएंगे। यह सोच गलत थी। दोनों लड़ते-लड़ते साथ रहने का रास्ता निकाल लेंगे और यह रास्ता हिंदुत्व का रास्ता होगा। हिंदुत्व ही हिंदुस्तान और यहां रहने वालों की पहचान है। यह केवल देह पोषण की राह नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों में विकसित विचार है।1-डा. मोहन मधुकर भागवत, आरएसएस प्रमुख

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